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डिजिटल भारत अभियान का उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक तक तकनीक की सुविधा पहुँचाना है। आज गाँव का किसान भी अपने मोबाइल फोन से फसल का भाव देख सकता है, मौसम की जानकारी प्राप्त कर सकता है और सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन कर सकता है। पहले जिन कामों के लिए लोगों को कई दिनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वे अब कुछ ही मिनटों में घर बैठे पूरे हो जाते हैं। बैंक खाते से सीधे लाभ हस्तांतरण की व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। इससे सरकारी धन सही व्यक्ति तक समय पर पहुँचने लगा है। ऑनलाइन भुगतान की सुविधा ने छोटे दुकानदारों और रेहड़ी वालों को भी नई ताकत दी है। अब वे बिना नकद लेनदेन के अपना व्यापार आसानी से चला रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी डिजिटल माध्यमों ने बड़ा परिवर्तन किया है। दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी अब अच्छे शिक्षकों के व्याख्यान अपने फोन पर देख सकते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। फिर भी इस अभियान के सामने कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अनेक गाँवों में आज भी इंटरनेट की गति धीमी है और बहुत से लोग तकनीक का सही उपयोग करना नहीं जानते। साइबर अपराध भी एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है। ठग लोग भोले भाले नागरिकों को फोन या संदेश भेजकर उनके बैंक खाते की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। इसलिए डिजिटल साक्षरता उतनी ही आवश्यक है जितनी डिजिटल सुविधा। यदि सरकार, समाज और नागरिक मिलकर प्रयास करें तो डिजिटल भारत का सपना पूरी तरह साकार हो सकता है और देश विकास की नई ऊँचाइयों को छू सकता है।

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Hindi Typing Paragraph – हिंदी टाइपिंग पैराग्राफ

दस निःशुल्क हिंदी अभ्यास अनुच्छेद, पूरे पाठ के साथ। Each is the length of a 10-minute run at 25 WPM, in the plain official Hindi that SSC, railway and court passages use. The test above opens in Hindi.

10 Passages

How Long Each Paragraph Takes

Minutes to finish = words ÷ WPM. Hindi targets are lower than English because matras and the halant are extra characters; at 25 WPM a 260-word passage is a complete 10-minute run.

Words ÷ WPM
ParagraphWordsAt 20 WPMAt 25 WPMAt 30 WPM
डिजिटल भारत27213.6 min10.9 min9.1 min
पर्यावरण संरक्षण26913.5 min10.8 min9 min
भारतीय रेलवे26913.5 min10.8 min9 min
न्यायपालिका और नागरिक26713.4 min10.7 min8.9 min
ग्रामीण विकास25812.9 min10.3 min8.6 min
स्वास्थ्य और जीवन शैली26513.3 min10.6 min8.8 min
शिक्षा का महत्व25412.7 min10.2 min8.5 min
भारतीय संविधान23912 min9.6 min8 min
जल संरक्षण27013.5 min10.8 min9 min
खेल और युवा25112.6 min10 min8.4 min

Ten Hindi Typing Passages

Unicode text, so it reads in any browser without a font. Type them in the test above on Remington GAIL (the Kruti Dev keys), Kruti Dev 010 or Inscript with your keyboard left on English.

Unicode

1. डिजिटल भारत

272 words · 1,346 characters · about 9.1 min at 30 WPM

डिजिटल भारत अभियान का उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक तक तकनीक की सुविधा पहुँचाना है। आज गाँव का किसान भी अपने मोबाइल फोन से फसल का भाव देख सकता है, मौसम की जानकारी प्राप्त कर सकता है और सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन कर सकता है। पहले जिन कामों के लिए लोगों को कई दिनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वे अब कुछ ही मिनटों में घर बैठे पूरे हो जाते हैं। बैंक खाते से सीधे लाभ हस्तांतरण की व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। इससे सरकारी धन सही व्यक्ति तक समय पर पहुँचने लगा है। ऑनलाइन भुगतान की सुविधा ने छोटे दुकानदारों और रेहड़ी वालों को भी नई ताकत दी है। अब वे बिना नकद लेनदेन के अपना व्यापार आसानी से चला रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी डिजिटल माध्यमों ने बड़ा परिवर्तन किया है। दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी अब अच्छे शिक्षकों के व्याख्यान अपने फोन पर देख सकते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। फिर भी इस अभियान के सामने कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अनेक गाँवों में आज भी इंटरनेट की गति धीमी है और बहुत से लोग तकनीक का सही उपयोग करना नहीं जानते। साइबर अपराध भी एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है। ठग लोग भोले भाले नागरिकों को फोन या संदेश भेजकर उनके बैंक खाते की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। इसलिए डिजिटल साक्षरता उतनी ही आवश्यक है जितनी डिजिटल सुविधा। यदि सरकार, समाज और नागरिक मिलकर प्रयास करें तो डिजिटल भारत का सपना पूरी तरह साकार हो सकता है और देश विकास की नई ऊँचाइयों को छू सकता है।

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2. पर्यावरण संरक्षण

269 words · 1,307 characters · about 9 min at 30 WPM

पर्यावरण का अर्थ है हमारे चारों ओर का वह आवरण जिसमें वायु, जल, भूमि, पेड़ पौधे और सभी जीव जंतु शामिल हैं। मनुष्य का जीवन पूरी तरह से इसी पर्यावरण पर निर्भर है। परंतु पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ते उद्योगों, वाहनों और शहरों ने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाया है। बड़े नगरों में वायु प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि सर्दियों के दिनों में साँस लेना भी कठिन हो जाता है। नदियों में कारखानों का गंदा पानी और कचरा डाले जाने से उनका जल पीने योग्य नहीं रहा। जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण वर्षा का चक्र बिगड़ रहा है और कई स्थानों पर सूखे तथा बाढ़ की घटनाएँ बढ़ गई हैं। जलवायु परिवर्तन आज पूरे विश्व के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे हिमनद पिघल रहे हैं और समुद्र का स्तर ऊपर उठ रहा है। इस संकट से निपटने के लिए सरकारों ने अनेक कदम उठाए हैं। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्लास्टिक की थैलियों पर रोक लगाई गई है और पौधारोपण के बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। प्रत्येक नागरिक को अपने दैनिक जीवन में छोटे छोटे बदलाव करने होंगे। हम बिजली और पानी की बचत कर सकते हैं, निजी वाहन के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सकते हैं और अपने घर के आसपास पेड़ लगा सकते हैं। कचरे को अलग अलग करके फेंकना भी एक अच्छी आदत है। यदि हम आज सावधान नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ धरती नहीं मिल पाएगी।

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3. भारतीय रेलवे

269 words · 1,358 characters · about 9 min at 30 WPM

भारतीय रेलवे देश की जीवन रेखा कही जाती है। यह विश्व के सबसे बड़े रेल तंत्रों में से एक है और प्रतिदिन करोड़ों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाती है। रेलवे केवल यात्रा का साधन ही नहीं है, बल्कि यह देश के विभिन्न भागों को आपस में जोड़ने का भी काम करती है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फैली रेल पटरियाँ अलग अलग भाषाओं और संस्कृतियों वाले लोगों को एक सूत्र में बाँधती हैं। माल ढुलाई के क्षेत्र में भी रेलवे की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोयला, अनाज, सीमेंट और लोहा जैसी भारी वस्तुएँ बड़ी मात्रा में कम खर्च पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजी जाती हैं। इससे उद्योगों को कच्चा माल समय पर मिलता है और वस्तुओं की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ने आधुनिकीकरण की दिशा में कई कदम उठाए हैं। अधिकांश मार्गों का विद्युतीकरण किया जा चुका है, जिससे ईंधन की बचत हो रही है और प्रदूषण कम हो रहा है। तेज गति वाली नई रेलगाड़ियाँ चलाई गई हैं और स्टेशनों को स्वच्छ तथा सुविधाजनक बनाया जा रहा है। टिकट आरक्षण की ऑनलाइन व्यवस्था ने यात्रियों का बहुत समय बचाया है। सुरक्षा के लिए स्वचालित संकेत प्रणाली और टक्कर रोधी तकनीक लगाई जा रही है। रेलवे देश में रोजगार देने वाले सबसे बड़े संस्थानों में भी शामिल है। हर वर्ष लाखों युवा रेलवे की भर्ती परीक्षाओं में भाग लेते हैं। यात्रियों का भी कर्तव्य है कि वे रेलवे की संपत्ति को अपनी संपत्ति समझें, डिब्बों को साफ रखें और नियमों का पालन करें। तभी यह विशाल व्यवस्था और बेहतर ढंग से देश की सेवा कर सकेगी।

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4. न्यायपालिका और नागरिक

267 words · 1,388 characters · about 8.9 min at 30 WPM

लोकतंत्र में न्यायपालिका का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। संविधान ने न्यायालयों को यह दायित्व सौंपा है कि वे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति या संस्था कानून से ऊपर न हो। हमारे देश में न्याय व्यवस्था का ढाँचा एक पिरामिड के समान है। सबसे ऊपर उच्चतम न्यायालय है, उसके नीचे राज्यों के उच्च न्यायालय हैं और फिर जिला तथा अधीनस्थ न्यायालय आते हैं। आम नागरिक का सबसे अधिक संपर्क जिला न्यायालयों से ही होता है। न्यायालयों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित मामलों की बढ़ती संख्या है। कई बार एक साधारण मामले का निर्णय आने में भी वर्षों लग जाते हैं। कहा जाता है कि न्याय में देरी न्याय से इनकार के समान है। इस समस्या को दूर करने के लिए न्यायालयों में कंप्यूटर और इंटरनेट का उपयोग बढ़ाया गया है। अब मामलों की सुनवाई की तारीख, आदेश और निर्णय ऑनलाइन देखे जा सकते हैं। कई अदालतों में वीडियो के माध्यम से भी सुनवाई होने लगी है, जिससे गवाहों और पक्षकारों का समय तथा धन दोनों बचते हैं। लोक अदालतें आपसी समझौते से छोटे विवादों को जल्दी निपटाने का एक अच्छा माध्यम बनी हैं। गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को निशुल्क कानूनी सहायता देने की व्यवस्था भी की गई है। न्यायालयों का कामकाज सुचारु रूप से चलाने में लिपिकों, आशुलिपिकों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी बहुत बड़ी होती है। आदेशों को शुद्ध रूप में टाइप करना और अभिलेखों को व्यवस्थित रखना उनका प्रमुख कार्य है। एक जागरूक नागरिक को भी कानून का सम्मान करना चाहिए और अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए।

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5. ग्रामीण विकास

258 words · 1,280 characters · about 8.6 min at 30 WPM

भारत की अधिकांश जनसंख्या आज भी गाँवों में निवास करती है। इसलिए कहा जाता है कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। देश का वास्तविक विकास तभी संभव है जब गाँवों का विकास हो। स्वतंत्रता के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति सुधारने के लिए अनेक योजनाएँ चलाई गई हैं। सड़कों के निर्माण से गाँव शहरों और मंडियों से जुड़ गए हैं, जिससे किसान अपनी उपज को अच्छे दाम पर बेच पा रहे हैं। हर घर तक बिजली पहुँचाने के अभियान ने ग्रामीण जीवन को काफी बदल दिया है। बच्चे अब रात में भी पढ़ाई कर सकते हैं और छोटे उद्योग भी चलने लगे हैं। पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था और शौचालयों के निर्माण से गाँवों में बीमारियाँ कम हुई हैं। ग्रामीण रोजगार योजना ने उन मजदूरों को सहारा दिया है जिन्हें खेती के मौसम के बाद काम नहीं मिलता था। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गाँव की महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं। वे छोटे छोटे ऋण लेकर सिलाई, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे काम शुरू कर रही हैं। पंचायतों को अधिक अधिकार और धन देने से स्थानीय स्तर पर निर्णय लेना आसान हुआ है। इसके बावजूद गाँवों के सामने अभी भी कई समस्याएँ हैं। अच्छे विद्यालयों और अस्पतालों की कमी के कारण लोगों को शहरों की ओर जाना पड़ता है। युवाओं के लिए गाँव में ही रोजगार के अवसर बहुत कम हैं। यदि गाँवों में कृषि आधारित उद्योग लगाए जाएँ और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाए तो पलायन रुक सकता है। एक समृद्ध गाँव ही एक समृद्ध राष्ट्र की नींव बन सकता है।

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6. स्वास्थ्य और जीवन शैली

265 words · 1,276 characters · about 8.8 min at 30 WPM

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। यह कहावत आज के समय में पहले से भी अधिक सच प्रतीत होती है। आधुनिक जीवन शैली ने हमें अनेक सुविधाएँ दी हैं, परंतु इसके साथ कई नई बीमारियाँ भी आई हैं। अधिकतर लोग दिन भर कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं और शारीरिक श्रम बहुत कम करते हैं। बाहर का तला भुना भोजन, अधिक मीठा और समय पर न खाना हमारी आदत बन चुका है। इसके कारण मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी समस्याएँ कम उम्र में ही दिखाई देने लगी हैं। मोबाइल फोन और कंप्यूटर की स्क्रीन पर घंटों समय बिताने से आँखों और नींद पर भी बुरा असर पड़ता है। मानसिक तनाव आज की एक बड़ी समस्या है, जिसे अक्सर गंभीरता से नहीं लिया जाता। अच्छे स्वास्थ्य के लिए किसी महँगे उपाय की आवश्यकता नहीं है। प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा पैदल चलना, योग करना या कोई खेल खेलना शरीर को सक्रिय रखता है। भोजन में हरी सब्जियाँ, फल, दालें और पर्याप्त पानी शामिल करना चाहिए। रात को समय पर सोना और सुबह जल्दी उठना एक अच्छी आदत है। परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहता है और तनाव कम होता है। सरकार ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है और गाँवों में स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं। फिर भी बीमारी का इलाज करने से अच्छा है कि हम बीमार ही न पड़ें। इसलिए हमें अपने स्वास्थ्य को सबसे बड़ी पूँजी मानकर उसकी देखभाल करनी चाहिए।

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7. शिक्षा का महत्व

254 words · 1,281 characters · about 8.5 min at 30 WPM

शिक्षा मनुष्य के जीवन का सबसे मूल्यवान आभूषण है। यह केवल पढ़ना लिखना सिखाने का साधन नहीं है, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, सोच और व्यवहार का निर्माण भी करती है। एक शिक्षित व्यक्ति सही और गलत में अंतर कर सकता है और अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों को भली भाँति समझता है। किसी भी देश की प्रगति उसके नागरिकों की शिक्षा के स्तर पर निर्भर करती है। हमारे संविधान ने छह से चौदह वर्ष तक के सभी बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया है। इसके परिणामस्वरूप विद्यालयों में बच्चों का नामांकन बढ़ा है और साक्षरता दर में लगातार सुधार हुआ है। विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। जब एक लड़की शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है। नई शिक्षा नीति में रटने के स्थान पर समझने और कौशल विकसित करने पर बल दिया गया है। मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा देने की बात भी कही गई है, ताकि बच्चे विषयों को आसानी से समझ सकें। व्यावसायिक शिक्षा को विद्यालय स्तर से ही जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थी पढ़ाई के साथ कोई हुनर भी सीख सकें। फिर भी शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियाँ शेष हैं। अनेक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है और पढ़ाई की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। गरीबी के कारण कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के साथ साथ समाज को भी आगे आना होगा। शिक्षा पर किया गया खर्च वास्तव में देश के भविष्य में किया गया निवेश है।

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8. भारतीय संविधान

239 words · 1,318 characters · about 8 min at 30 WPM

भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसे संविधान सभा ने लगभग तीन वर्षों के कठिन परिश्रम के बाद तैयार किया था और यह छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास को लागू हुआ। इसी कारण हम हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। संविधान की प्रस्तावना में भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया है। प्रस्तावना में सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता का लक्ष्य रखा गया है। संविधान नागरिकों को कई मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इनमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्रमुख हैं। यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है तो वह सीधे न्यायालय की शरण ले सकता है। अधिकारों के साथ साथ संविधान में नागरिकों के मौलिक कर्तव्य भी बताए गए हैं। राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना, देश की एकता और अखंडता की रक्षा करना तथा सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना हमारे कर्तव्यों में शामिल है। संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका उनकी व्याख्या करती है। समय की आवश्यकता के अनुसार संविधान में संशोधन करने की व्यवस्था भी रखी गई है, जिससे यह एक जीवंत दस्तावेज बना हुआ है। प्रत्येक नागरिक को संविधान के मूल्यों को समझना चाहिए और उनके अनुसार आचरण करना चाहिए।

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9. जल संरक्षण

270 words · 1,291 characters · about 9 min at 30 WPM

जल ही जीवन है, यह बात हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। पृथ्वी के अधिकांश भाग पर पानी होने के बावजूद पीने योग्य मीठे पानी की मात्रा बहुत कम है। बढ़ती जनसंख्या, खेती में पानी की अधिक खपत और उद्योगों के विस्तार के कारण पानी की माँग लगातार बढ़ रही है। देश के कई हिस्सों में भूजल का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। गर्मियों के दिनों में अनेक शहरों और गाँवों में पानी के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। कई स्थानों पर लोगों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। इस संकट का एक बड़ा कारण पानी की बर्बादी भी है। नलों से पानी बहता रहता है, पाइपलाइनों में रिसाव होता है और खेतों में आवश्यकता से अधिक सिंचाई की जाती है। जल संरक्षण के लिए वर्षा के पानी को सहेजना सबसे प्रभावी उपाय है। घरों की छतों पर गिरने वाले वर्षा जल को टंकियों या गड्ढों में एकत्र करके भूजल का स्तर बढ़ाया जा सकता है। पुराने तालाबों, कुओं और बावड़ियों की सफाई करके उन्हें फिर से उपयोगी बनाया जा सकता है। खेती में टपक सिंचाई और फव्वारा सिंचाई जैसी विधियाँ अपनाकर बहुत पानी बचाया जा सकता है। कारखानों को अपने गंदे पानी को साफ करके दोबारा उपयोग करना चाहिए। सरकार ने हर घर तक नल से जल पहुँचाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह तभी सफल होगा जब जल स्रोत सुरक्षित रहेंगे। हमें अपने घर में भी छोटी छोटी आदतें बदलनी होंगी, जैसे दाँत साफ करते समय नल बंद रखना और बचे हुए पानी से पौधों को सींचना। पानी की हर बूँद कीमती है और इसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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10. खेल और युवा

251 words · 1,318 characters · about 8.4 min at 30 WPM

खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे शरीर और मन दोनों को मजबूत बनाते हैं। खेलों से अनुशासन, धैर्य, टीम भावना और हार को स्वीकार करने की क्षमता विकसित होती है। एक अच्छा खिलाड़ी जीवन की कठिन परिस्थितियों का भी साहस के साथ सामना करना सीखता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खेलों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हमारे खिलाड़ियों ने कुश्ती, मुक्केबाजी, भाला फेंक, निशानेबाजी, बैडमिंटन और हॉकी जैसे खेलों में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। इनमें से कई खिलाड़ी छोटे कस्बों और गाँवों से आए हैं, जिन्होंने सीमित साधनों के बावजूद कड़ी मेहनत करके सफलता प्राप्त की। उनकी सफलता ने देश के लाखों युवाओं को खेलों को गंभीरता से अपनाने के लिए प्रेरित किया है। सरकार ने भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने और उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है और खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है। अनेक सरकारी विभागों में खेल कोटे के अंतर्गत नौकरियाँ भी दी जाती हैं। फिर भी अभी बहुत कुछ करना बाकी है। कई क्षेत्रों में अच्छे मैदानों, प्रशिक्षकों और उपकरणों की कमी है। माता पिता भी अक्सर बच्चों को पढ़ाई के दबाव में खेलने का समय नहीं देते। हमें यह समझना होगा कि पढ़ाई और खेल एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। यदि हर बच्चे को खेलने का अवसर मिले तो भारत आने वाले समय में एक बड़ी खेल शक्ति बन सकता है।

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Hindi Papers These Paragraphs Prepare For

From the notices read for this site. Each exam page has three Hindi passages of its own on top of these ten.

8 Exams
ExamHindi targetLayout the notice namesTime
SSC CHSL LDC / JSA30 WPMMangal only from the 2026 notice10 minutes
RRB NTPC25 WPM, at least 250 wordsKruti Dev or Mangal10 minutes
CAPF HC (Ministerial)30 WPMMangal with Remington GAIL10 minutes
MP CPCT20 net WPM, compulsoryUnicode, Remington GAIL or Inscript15 minutes
MP High Court Assistant Gr IIIAbout 350 wordsRemington GAIL10 minutes
Patna High Court30 WPM, 85% accuracyMangal with Remington GAIL10 minutes
RSSB LDC / Junior AssistantMarks per correct wordDevLys 010Speed and efficiency papers
UPSSSC Junior Assistant25 WPM (as reported)Kruti Dev 010 or Mangal Inscript (claim)5 minutes each language

What Makes a Hindi Exam Passage

The ten paragraphs follow the register of official Hindi so that nothing in the hall reads unfamiliar.

Pattern
Register

Official, not literary

Passages read like a government circular or a newspaper editorial: schemes, institutions, civic duties. Few Sanskritised rare words, no dialect, no poetry.

Conjuncts

Conjuncts and matras everywhere

Words such as संविधान, प्रशासन and स्वास्थ्य carry conjuncts that take two or three keys. These are where speed drops; drill them from the mistake list after each run.

Punctuation

The danda is a character

A missed danda (।) is half a mistake. On Remington GAIL and Kruti Dev it has its own key; on Inscript it is on the full-stop key. Type it as deliberately as a letter.

Unicode

Mangal and Kruti Dev show the same text

These paragraphs are Unicode, which a Mangal console records. A Kruti Dev exam displays the same words in a legacy font; the keys you press on the Kruti Dev layout here are the same ones.

ि comes before its consonant on the typewriter layouts. On Remington GAIL and Kruti Dev the test types ि in typewriter order: press the ि key first, then the consonant, as किसान = ि + क + सा + न. Inscript is phonetic: consonant first, then the matra. Choose the layout your notice names and stay with it.

How to Practise a Hindi Paragraph

The same six-step rotation as the English paragraphs, with Hindi-specific drills.

  • First run on the layout your exam names, Backspace on, 10 minutes. Note the net WPM and the mistake list.
  • Drill the conjuncts you missed: type each word ten times before the next run.
  • Second run with Backspace off if your exam is RRB NTPC or CAPF, where correction is locked.
  • Print a paragraph and type from paper once a week; most Hindi papers hand you the passage printed.
  • Rotate the ten passages daily so memory does not inflate the score.
  • Once all ten sit above target, move to your exam page, which adds that exam's own three Hindi passages and judges by its rule.

Hindi Typing Paragraph FAQ

6 Questions
Free

Are these Hindi typing paragraphs free?

Yes. They are the ten free Hindi passages of this site, shown in full here and loaded in the test above. No sign-in is needed to read, print or type them.

Font

Do I need Kruti Dev or Mangal installed to read them?

No. The text is Unicode, which every browser and phone displays. To type them, the test above emulates the Remington GAIL, Kruti Dev 010 or Inscript layout from your English keyboard, so nothing is installed.

Length

How many words should a Hindi typing paragraph have?

More than the candidate can finish at the target speed. At 25 WPM over 10 minutes that is 250 words, which is why these run 240 to 270 words. RRB NTPC states at least 250 words; MP High Court about 350.

Exam

Are these the SSC or RRB Hindi passages?

No. Boards do not publish their passages and this site does not claim exam papers. The paragraphs follow the same official register, length and conjunct density.

Layout

Which Hindi layout should I practise on?

The one your notice names. SSC CHSL accepts Mangal only from 2026 (Remington GAIL or Inscript keys both produce it); RRB names Kruti Dev or Mangal; CAPF and Patna High Court name Mangal with Remington GAIL; RSSB names DevLys 010, which shares the Kruti Dev keys.

PDF

Can I get the Hindi paragraphs as a PDF?

Use Print in your browser and choose Save as PDF. The Devanagari prints as it displays, with each passage titled, which is enough for paper practice.

10 Tests